हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मस्जिद-ए-मुकद्दस जमकरान के मुतवल्ली हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद अली अकबर उजाद नेजाद ने कहा है कि बकरीद का सबसे बड़ा सबक़ ख़ुदा की रज़ा के लिए कुर्बानी, ईसार और अपनी ज़िम्मेदारियों की अदाएगी है, जबकि मौजूदा हालात में उम्मत-ए-मुस्लिमा के इत्तेहाद, भाईचारे और सामूहिक मैदान में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की सख्त ज़रूरत है।
बकरीद के मौके पर मस्जिद-ए-मुकद्दस जमकरान में नमाज़-ए-ईद से ख़िताब करते हुए उन्होंने मुसलमानों को इस अज़ीम ईद की मुबारकबादी पेश की और दुआ की कि अल्लाह तआला इस दिन को पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमा के लिए ख़ैर ओ बरकत का सबब क़रार दे। उन्होंने इसतिकबारी ताक़तों के ख़िलाफ़ मुख्तलिफ़ मोर्चों पर जद्दोजहद करने वाले मुजाहिदीन की कामयाबी और नुसरत के लिए भी दुआ की।
उन्होंने हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सीरत की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि बकरीद इंसान को यह सबक़ देती है कि अल्लाह तआला की राह में अपनी ख़्वाहिशात, मफ़ादात और ताल्लुकात की कुर्बानी देना ही हक़ीक़ी कामयाबी का रास्ता है।
उनके मुताबिक हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने माली, जानी और ख़ानदानी आज़माइशों में कामयाबी हासिल करके "ख़लीलुल्लाह" का अज़ीम मक़ाम पाया और पूरी इंसानियत के लिए नमूना बन गए।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन उजादनेजाद ने कहा कि इंसान जब तक अपनी ज़ाती ख़्वाहिशात पर क़ाबू पाकर ईसार और कुर्बानी के जज़्बे को इख़्तियार नहीं करता, उस वक्त तक आली रूहानी मरातिब हासिल नहीं कर सकता। उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की कि अल्लाह तआला बकरीद के इस बा बरकत दिन में सबको अपनी रज़ा के रास्ते पर चलने की तौफीक़ अता फरमाए।
उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि हर दौर में इंसान की सबसे अहम ज़िम्मेदारी अपने इलाही फ़राइज़ की अदाएगी है, जबकि आज के हालात में इत्तेहाद, बाहमी उख़ुव्वत और सामाजिक मैदान में फ़ेअल किरदार अदा करना वक़्त की अहम ज़रूरत है।
मुतवल्ली मस्जिद-ए-जमकरान ने रहबर-ए-मोआज़म इंक़िलाब-ए-इस्लामी की हिदायात पर अमल करने और क़ौमी एकजहती को बरक़रार रखने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि इंक़िलाब-ए-इस्लामी के अहदाफ़ को आगे बढ़ाने और मआशराती व इंक़िलाबी ज़िम्मेदारियों की अंजामदेही में रहबराई के उसूलों को मेहवर बनाया जाना चाहिए।
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